जय बोलो बेइमान की

-विजय कुमार- शर्मा जी ने तय कर लिया है कि चाहे जो भी हो और जैसे भी होय पर अपने प्रिय देश भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करके ही रहेंगे। शर्मा जी छात्र जीवन में भी बड़े उग्र विचारों के थे। भाषण और निबन्ध प्रतियोगिताओं में वे भ्रष्टाचार के…
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अपना-अपना लोकतंत्र

-शशिकांत सिंह शशि- अंग्रेज हमें जो लोकतंत्र दे गये। उसे हमने संभाल कर रखा है। लोकतंत्र ही नहीं कायदे-कानून, फैशन, रीति-रिवाज और दरबारी ठाठ सब सलामत है। लोकतंत्र को तो हवा भी नहीं लगने दी। जस का तस संविधान में रख दिया। चुनाव के दिनों में…
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पैसा हाय पैसा  

-यज्ञ शर्मा- आज सारी दुनिया में पैसे को ले कर हाय−हाय मची हुई है। हमारा देश भी उस हायतौबा की गिऱफ़्त में है। जबसे पैसे का आविष्कार हुआ है, उसका महत्त्व बढ़ता ही गया। लेकिन, अब तो पैसा कमाना ही जिंदगी बन गया है। चोरी करो, डाका डालो, झूठ…
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मेरी दिल्ली मेरी शर्म

-राजकिशोर- दिल्ली में रहने वाला कोई भी हिन्दी लेखक दिल्ली से खुश नहीं रहा। मेरी पढ़ाई कम है, इसलिए इस समय तीन ही लेखक याद आ रहे हैं। पहले हैं, रामधारी सिंह दिनकर। दिल्ली ने उन्हें मंत्री पद छोड़कर सब कुछ दिया। अपने संस्मरणों में उन्होंने कई…
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तुम आदमी हो या…

-विजय कुमार- शर्मा जी को हम सबने मिलकर एक बार फिर ‘वरिष्ठ नागरिक संघ’ (वनास) का अध्यक्ष चुन लिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच वर्मा जी ने उनकी झूठी−सच्ची प्रशंसा के पुल बांधे और बाबूलाल जी ने उन्हें माला पहनायी। शर्मा जी ने सबको धन्यवाद दिया…
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शराबी के मुँह की दुर्गन्ध माँ और पत्नी को महसूस नही होती

डाॅ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी हमारे खानदान के सभी ढाई, तीन, साढ़े तीन अक्षर नाम वाले लोग निवर्तमान नवयुवक हो चुके हैं, कुछ तो जीवन की अर्धशतकीय पारी खेल रहे हैं तो कई जीवन के आपा-धापी खेल से रिटायर भी हो चुके हैं। कुछ जो बचे हैं वे लोग…
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बलात्कारियों द्वारा नेताजी का अभिनन्दन

-गिरीश पंकज- कुछ भूतपपूर्व और कुछ अभूतपूर्व बलात्कारी एक जगह एकत्र हो कर एक नेता जी का अभिनन्दन कर रहे थे। नेता जी ने काम ही ऐसा कर दिया था की उनका अभिनन्दन किया जाये। नेता जी ने पिछले दिनों युवा बलात्कारियों की हौसलाआफ़ज़ाई के लिए अद्भुत…
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एमएलए फैमेले

नेताओं की देश सेवा की भावना दिन पर दिन ज्यादा बड़ी होती जा रही है। अब उनका काम सिर्फ एमएलए फैमेले बनने से नहीं चलता। वे सब सीधे मंत्री बनना चाहते हैं। देश में बहुत दिनों से चुनावों में सुधार करने की चर्चा चल रही है। सुधार दोनों को चाहिए,…
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सच बता, किसकी भैंस है तू

-सुनीता शान- ओए, तू किसकी भैंस है बोल! ऐ, रुक कहां जाती है? बेचारे सिपाही कभी भैंस को ढूंढेंगे, कभी कुत्तों को। देश की भैंस जाए पानी में, हमको क्या। हां, मंत्री जी की भैंस का सवाल है, भैया। भैंस न हुई, फिल्म की हीरोइन हो गई, जो कभी टीवी,…
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पैसा हाय पैसा  

-यज्ञ शर्मा- आज सारी दुनिया में पैसे को ले कर हाय−हाय मची हुई है। हमारा देश भी उस हायतौबा की गिऱफ़्त में है। जबसे पैसे का आविष्कार हुआ है, उसका महत्त्व बढ़ता ही गया। लेकिन, अब तो पैसा कमाना ही जिंदगी बन गया है। चोरी करो, डाका डालो, झूठ…
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