गगरी

अंजली गोस्वामी चोरसौ, गरुड़ बागेश्वर, उत्तराखंड पानी क्या है, क्या है उसकी जाति? पूछ गगरी से शीतल जल कैसे कर पाती? गगरी हूं, मिट्टी पानी से बन जाती। कुंभकार का पसीना मेहनत रंग लाती। जल कर आती मैं अवगुणों को मार पाती। हर प्यासे…
Read More...

मां

निशा गढ़िया कपकोट, बागेश्वर उत्तराखंड माँ कहती थी तू जान है मेरी। प्यारी प्यारी मां है तू मेरी।। मां एक भगवान है। बच्चों के लिए मां उसकी जान है।। मां ही मुझे दुनिया में लाई। वही मेरी मां कहलाई।। लोरी गाकर हमें सुलाती। बचपन की…
Read More...

बेटियां

हिमानी दानू कपकोट, बागेश्वर उत्तराखंड जिसे जन्म लेते ही मार डाला गया। उसे इस संसार में आने से रोका गया। क्यों होता है अक्सर बेटियों के साथ ऐसा? क्यों बेटियों को समझा जाता है बोझ? क्यों उनको कोसा जाता है? तुम तो पराए घर की हो।…
Read More...

औरत का सम्मान

उषा गोस्वामी मेगडीस्टेट, गरुड़ बागेश्वर, उत्तराखंड औरत से सम्मान मिला है। धरती का अभिमान बढ़ा है।। समाज ने छीना है, औरत का अधिकार। क्यों हर बार दे औरत ही अपना बलिदान।। उसको न समझो कमजोर। उसकी शक्ति चारों ओर।। बने कमिश्नर, बने…
Read More...

चाह नहीं है अब मुझको

पायल रावल चोरसौ, गरुड़ बागेश्वर, उत्तराखंड चाह नहीं है अब मुझको, कहलाऊँ मैं सीता जैसी। अब तो बस उड़ना चाहती हूं, बिल्कुल कल्पना जैसी।। फिर क्यों बनूं मैं द्रौपदी जैसी। कहां बचा है कोई अब कृष्ण जैसा।। अब तो बस लड़ना चाहूं, लड़ाई…
Read More...

अकेले उन रास्तों में वह सहम सी गई थी

मंजू धपोला कपकोट, बागेश्वर उत्तराखंड अकेले उन रास्तों में वह सहम सी गई थी। वह चार थे और बेचारी अकेली खड़ी थी।। बेदर्द है जमाना सुना था उसने। लग रहा था वह बेदर्दी देखने वाली थी।। कोमल से हाथो को कस के पकड़ा था उन जालिमों ने। और…
Read More...

कह रही है अजन्मी

-लक्ष्मी जायसवाल- कह रही है अजन्मी मां मैं भी इस दुनिया में आना चाहती हूं नन्हे नन्हे पैरो से मैं भी गिरकर ठोकर खाना चाहती हूं हपतस गिरते गिरते उठकर सम्भलना चाहती हूं तेरी उंगली पकड़कर चलना चाहती हूं तोतली जबान में कभी तो कभी…
Read More...

स्वच्छता

सपना आर्य चलकाना,कपकोट बागेश्वर, उत्तराखंड आओ मिलकर एक कदम उठाएं। स्वच्छता पर एक ध्यान लगाएं।। सुनो, जागो और स्वच्छता को मिशन बनाओ। साफ-सफाई का रखोगे ध्यान। तब बनेगा भारत महान।। आओ मिलकर कदम बढ़ाएं। स्वच्छता पर ध्यान…
Read More...

क्यों घुट घुट जाती हूं

संजना आर्य चौकसो, गरुड़ बागेश्वर, उत्तराखंड क्यों घुट-घुट जाती हूं। बंद कमरे में रहती हूं। दर्द पीड़ा मैं सहती हूं। फिर भी कुछ नहीं कहती हूं।। क्यों बंद पिंजरे में रहती हूं। क्यों नहीं आगे बढ़ पाती हूं। प्यार सभी को करती…
Read More...

सपने

नीमा गढ़िया पोथिंग, कपकोट बागेश्वर, उत्तराखंड सपने वो नही होते, जो सोने के बाद आते हैं। सपने तो वो होते हैं, जो हमें सोने नहीं देते हैं। जो हमें हर रोज एक मंजिल दिखाते हैं, हम में नया जोश भर देते हैं। हमें हमारी मंजिल तक पहुंचाते…
Read More...