मां, पर पीर तो होती होगी

-अरुण तिवारी- गांव की सबसे बङी हवेली उसमें बैठी मात दुकेली, दीवारों से बाते करते, दीवारों से सर टकराना, दीवारों सा मन हो जाना, दूर बैंक से पैसा लाना, नाज पिसाना, सामान मंगाना, हर छोटे बाहरी काम की खातिर दूजों से…
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प्रभु से पुकार

-राकेशधर द्विवेदी- आज अखबार में एक खबर छपी है भुखमरी से एक किसान की मृत्यु हुई है रोटी, कपड़ा और मकान का सपना लिए मर गया एक इंसान धूप में तपता हुआ विकास और प्रगति की ये अधूरी तस्वीरें मिटा न पाई पेट की भूख को पूरी बिक गए…
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मर्यादा

सुहानी जोशी (उत्तराखण्ड) मर्यादा क्या होती है जरा बताना लफ्जों से बयां हो जाती है क्या? जरा समझाना। किस पर कब क्या लागू होती है ये मर्यादा मैने तो जिक्र किया भी नहीं अब क्या कहूं इससे ज्यादा। क्या वाकई कोई बंधन है ये मर्यादा या…
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मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग

-फैज अहमद फैज- मुझसे पहली सी मुहब्बत मेरी महबूब न मांग मैंने समझा था कि तू है तो दरख्शां है हयात तेरा गम है तो गमे-दहर का झगड़ा क्या है तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है? तू जो…
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नींद

-अनुप्रिया- चंदा बादल संग खेलता शोर मचाते तारे तू भी सो जा कहती मम्मा सो गए अब तो सारे आसमान ने ओढ़ लिया है काला सा क्यूं रंग नींद बांटती सबको देखो सपने रंग-बिरंग ऊंघ रहे हैं परदे-खिड़की तकिया और रजाई…
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सजा

-नीरज अहलुवालिया- मुझको बह जाने में गुरेज नहीं, तेरी फितरत से भी परहेज नहीं, आपशारों पे मगर रुक ना सका, पानी होने की सजा खूब मिली, पानी होने की सजा खूब मिली..... अश्क था, दर्द का सुरूर ले कर, खारे दरियाओं का गुरूर ले कर, तेरी…
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और कुछ देर मुझे पास बिठाये रखिये

-उर्मिलेश शंखधर-   और कुछ देर मुझे पास बिठाये रखिये ज़िन्दगी जीने का माहौल बनाये रखिये, बात होठों से जो निकलेगी तो सब सुन लेंगे आंखों-आंखों में ही बातों को सुनाये रखिये, वक़्त का किसको भरोसा है कहां ले जाये आज की रात मेरा साथ निभाये…
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नींद

-अनुप्रिया- चंदा बादल संग खेलता शोर मचाते तारे तू भी सो जा कहती मम्मा सो गए अब तो सारे आसमान ने ओढ़ लिया है काला सा क्यूं रंग नींद बांटती सबको देखो सपने रंग-बिरंग ऊंघ रहे हैं परदे-खिड़की तकिया और रजाई…
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कितनी बड़ी क़ीमत है!

-संध्या गर्ग- तुमने कहा था- ”तुम्हीं मेरे लिए भगवान हो” सुनकर बहुत अच्छा नहीं लगा था जान गई थी रहना पड़ेगा एक और रिश्ते में भगवान की उस मूर्ति की तरह जो खड़ी रहती है चुपचाप... लोग आते हैं उसके पास…
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खुद्दार दिल

-मंजु वशिष्ठ- प्यार कर वो पार उतरे हम किनारे रह गए सत्य का कर के भरोसा हम सहारे रह गए चंद सपने थे संजोए साथ तेरे सजना टूट चकनाचूर सारे वो नजारे रह गए चांद फैला गर्दिशों में चांदनी का नूर ले देख आलम बेबसी का चुप सितारे रह…
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