पत्रकारिता के साथ ही साहित्य में अपनी पहचान बना रहे हैं आजमगढ़ के नितेश यादव

नितेश यादव आजमगढ़। कहा जाता है कि "वीर भोग्या वसुंधरा" अर्थात् भौतिक सुख-सुविधाओं को वीर ही उपभोग करते हैं और कर्मठ लोग अपना मार्ग प्रशस्त कर ही लेते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है दरभंगा में कार्यरत युवा पत्रकार नितेश यादव की। पत्रकार नितेश…
Read More...

अनोखी लेखन शैली है बस्ती निवासी पत्रकार रमाकांत यादव की पहचान, साहित्य में भी है गहरी रुचि

रमाकांत यादव कहा जाता है कि साधारण लोग तो केवल अनुसरण करते हैं लेकिन साहसी व्यक्ति नया मार्ग प्रशस्त करते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है दरभंगा में कार्यरत युवा पत्रकार रमाकांत यादव की। पत्रकार रमाकांत यादव 'राज' अपनी रिपोर्टों के माध्यम से…
Read More...

समीक्षा : तेंतर (कहानी)

-मुंशी प्रेमचंद- कई बार मैंने भी बचपन में अपनी दादी के मुंह से यह कहते सुना था कि तेंतर बच्चे बहुत ही खुराफाती, झगड़ालू, गुस्से वाले और अशुभ होते है। उनके वजह से घर में हमेशा अशांति और लड़ाई-झगड़े का माहौल बना रहता है क्योंकि मेरी ही दादी के…
Read More...

पहली बरसात (बांग्ला कहानी)

अमर मित्र बूढ़े ने कहा, थाना पीरतला...ग्राम हाथीशाला। अब इस कलकत्ते में ही हूं। पीरतला, हाथीशाला..... किस ओर है? सुप्रिया पूछती है। यहां से इक्यानवे नंबर बस में जाएं तो भेजहाट सड़क पर हाथीशाला-पीरतला पड़ेगा दीदी। बूढ़े ने कहा। वह…
Read More...

कहानी: नंबर वन

-गीता दुबे- मैं अपनी जिंदगी से बिल्कुल संतुष्ट थी, कोई शिकायत नहीं थी मुझे जिंदगी से. विवाह के आठ वर्ष बाद ईश्वर ने हमें एक बेटा दिया था, हम दोनों ने उसे नाजों से पाल- पोसकर बड़ा किया, अच्छे स्कूल में पढ़ाया, पढ़ लिखकर वह ऑफिसर बन गया, हमने…
Read More...

तीसरा बटन

-सुशील यादव- आज कालेज कैंपस में सन्नाटा पसरा है। 3 छात्रों की पिकनिक के दौरान नदी में डूब जाने से अकस्मात मौत हो गई। सभी होनहार विद्यार्थी थे। हमेशा खुश रहना व दूसरों की मदद करना उन की दिनचर्या थी। वे हमारे सीनियर्स थे। कालेज का…
Read More...

पुस्तक समीक्षा: खो गया गांव

समीक्षक: सुरेश कुमार पाण्डेय  पुस्तक: खो गया गांव (कहानी संग्रह), लेखक: डॉ. (श्रीमती) अपर्णा शर्मा, प्रकाशक: माउण्ट बुक्स, दिल्ली, संस्करण-2011, पृष्ठ: 112, मूल्य: रुपया 220  खो गया गांव की कहानियां मानवीय सम्बन्धों से अपने को जोड़ कर…
Read More...

एक कंजूस की प्रेम कहानी

-अर्चना चतुर्वेदी-  सयाने जानते हैं कि आशिकी बड़ा खर्चीला काम है। इस काम में बंदे की जेब को पेचिश हो जाती है और टाइम की फर्म का दिवाला निकल जाता है। पर फिर भी लोग हैं कि आशिकी करते हैं कारण सिर्फ ये कि खतरों से खेलने का शौक भी तो एक शौक…
Read More...

एक चिनगारी घर को जला देती है

तोल्सतोय अनुवाद -प्रेमचंद एक समय एक गांव में रहीम खां नामक एक मालदार किसान रहता था। उसके तीन पुत्र थे, सब युवक और काम करने में चतुर थे। सबसे बड़ा ब्याहा हुआ था, मंझला ब्याहने को था, छोटा क्वांरा था। रहीम की स्त्री और बहू चतुर और सुशील थीं।…
Read More...

बंद गली

-जसविंदर शर्मा- मैं मानती हूं कि मेरी इस उम्र में शरीर कई बीमारियों का घर बन जाता है परन्तु मेरी ज्ञानेन्द्रियों के साथ इन दिनों एक विशेष प्रकार की समस्या होती जा रही है। मैं लोगों को बताती हूं मगर वे यकीन नहीं करते। वे कहते हैं कि ऐसा भी…
Read More...