ना छोडूंगी साथ तुम्हारा

दीपिका कुमारी बामणिया जैसलमेर, राजस्थानना छोडूंगी साथ तुम्हारा लिख दिया है, ना कुसुम, न तारा, न वो मिट्टी का प्याला है, जज़्बात और एहसास से भरा वो मखलूक निराला है, ना छोडूंगी साथ तुम्हारा बस लिख दिया है, तुम भी साथ निभाओगे ना?…
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रिश्ता

पल्लवी भारतीमुजफ्फरपुर, बिहार   कहां पर बोलना है और कहां पर बोल जाते हैं, जहां खामोश रहना वहां मुंह खोल जाते हैं, समाज का यही उसूल है, कोई पास तो कोई दूर है, रिश्तों में नजदीकियां नहीं, यहां कोई अपना नहीं, किसी की आंखों में…
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केवल एक दिन की बात नहीं

गुंजन बिष्ट गरुड़, उत्तराखंडकेवल एक दिन की बात नहीं, हम सदियों से सताये गये हैं, लड़का और लड़की के नाम पर, भेदभाव के फंदे में बांधे गये हैं, और ज़िंदगी भर रुलाये गए हैं, मेरे इस दामन को ज़रा ग़ौर से देखो, इसमें भी भेदभाव के दाग…
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लापता हो गई खुशियां मेरी

दमयंती कक्षा-11वीं गरुड़, उत्तराखंडलापता हो गई खुशियां मेरी, गम ज्यादा दूर न था, वक्त कैसे कटा ये पता न था, जब वक्त के हाथों मजबूर थी, मैं तो पुराना खंडहर हो गई, जो कभी जगमगाया करती थी, वो बुझा हुआ दीया हो गई, जो अंधेरों से डरती…
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मुझे भी तो चाहिए आजादी

दीपा लिंगढिया गरुड़, बागेश्वर उत्तराखंडमुझे भी तो चाहिए आजादी हां, थी मैं अनजान की, दुनिया ऐसी भी होती है, बचपन की हर बात याद आती है, तुम किसी से बात नहीं कर सकती, लड़की हो, अपनी मर्यादा में रहो, तुम सिर्फ घर के ही काम करो,…
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तुझे भी सब कुछ करना है

दिव्या धपोला कपकोट, बागेश्वर उत्तराखंडबस की तेरे सब कुछ है, तू क्यों नहीं कुछ करती है? जानते हुए भी क्यों अनजान बनती है? मन में तेरे बहुत सारे सपने हैं, कब तक दबा कर रखेगी इन्हें? ये दुनिया है बस चलती रहेगी, तू अपना रास्ता…
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स्त्री की प्यारी दुनिया

कल्पना जोशी कक्षा-9 ,उम्र-17 गरुड़ , बागेश्वर उत्तराखंडस्त्री की प्यारीदुनिया, इतनी न्यारी होगी क्या? दर्द झेलती दुनिया से सारी, फिर भी न समझे कोई प्यारा, समाज से करते इसे हैं दूर, और फिर करते जीने को मजबूर, करते ना स्त्री का…
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हर वक्त एक ही सवाल

साक्षी देवरारी गरुड़, बागेश्वरउत्तराखंडहर वक्त एक ही सवाल मन में दौड़ता है, कैसे कोई पल में अच्छा और बुरा बन जाता है? बैठे-बैठे यही सोचती हूं, जवाब नही मिल पता है, जब वह अच्छा बनता है, तो तारीफें करता है, और जब…
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मेरा पहाड़

प्रियांशी कक्षा-9 गरुड़, उत्तराखंड   पहाड़ों से घिरी, बादलों से ढकी, ऊंचे-नीचे ढलानों में बसी, ऐसी है हमारी पहाड़ी जिंदगी, मां की छत्रछाया में बीता बचपन हमारा, मन हमारा पवित्र और दिल में है धैर्यता, पहाड़ में बस हमें शांति ही…
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बंद करो दहेज लेना

भावना कपकोट, उत्तराखंडबेटी का हाथ मांगने आते मगर, दहेज की बात पहले करवाते, समझ नहीं आता बेटे का घर, बसाते या किसी का घर उजाड़ते? कहते हैं, हमें गाड़ी बंगला चाहिए, देते हो अगर तो तुम्हारी बेटी चाहिए, एक बाप कर भी क्या सकता है?…
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